शनिवार, 12 सितंबर 2009

उफ़ ये बरसात

अरे इस साल तो बरसात हो ही नहीं रही है । ये जुमला हर तरफ़ सुनने को मिलता था तो लीजिये अब बरसात का मजा । पिछले ३ दिन से बरसात रुकने का नाम नहीं ले रही है और सड़क पर गढ्ढे और जगह जगह पानी भरा हुआ देख कर अब लोग बरसात से तंग आ गए हैं .वैसे मैं ये सोचता हूँ की क्या और देशों की राजधानी में भी इस तरह के हालात् होते होंगे हर क्षेत्र में तरक्की करने के बावजूद आख़िर हम जल-भराव की समस्या से हम क्यों नहीं निबट पा रहे । दो दिन की बरसात में ही हमारी दिल्ली के हाल बुरे हो जाते हैं । जगह जगह जाम लग जाता है दुर्घटनाएं हो जाती हैं । लगता ही नहीं की हम भारत की राजधानी में हैं .